@musafir

बोल, कि थोड़ा वक्त बहुत है
ज़िस्मों ज़ुबां की मौत से पहले

बोल, कि सच ज़िन्दा है अब तक
बोल, जो कुछ कहना है कह ले  

-Faiz

@anuragsingh @[email protected] @RuhiShaikh

"तुम्हारे पांव के नीचे कोई ज़मीन नहीं
कमाल है कि, फ़िर भी तुम्हें यक़ीन नहीं"

दुष्यंत कुमार

@anuragsingh @[email protected] @RuhiShaikh

"तेरी ज़ुबान है झूठी ज्म्हूरियत की तरह
तू एक ज़लील-सी गाली से बेहतरीन नहीं"

—दुष्यंत कुमार

@anuragsingh @[email protected] @RuhiShaikh

"न कोई प्रजा है
न कोई तंत्र है

यह आदमी के खिलाफ़
आदमी का खुला सा
षड़यन्त्र है।"

—धूमिल

@musafir @anuragsingh @[email protected] So relevant to the present senseless times!