@Rowdytalks वासना पर एक महाकाव्य तो लिखना बनता है

@Rowdytalks इसे हम ऐसे भी लिख सकते हैं (आपकी अनुमति से)

अंग से अंग का जब मिलन होता है तो यौवन की अग्नि व कौमार्य की आंच पर वासना की आहुति होती है और कामुकता से ओतप्रोत आलिंगन में गूँथे हुए अंग एक अन्य को आत्मसात करने का प्रयास करते हैं और तभी यथार्थ में संभोग होता है।