हिमाचल शिक्षक अनशन: 43 दिन बाद खत्म हुआ प्राथमिक शिक्षकों का क्रमिक अनशन
Himachal News: हिमाचल प्रदेश में हिमाचल शिक्षक अनशन शनिवार को समाप्त हो गया। शिमला के लालपानी स्थित शिक्षा निदेशालय में 43 दिनों से चल रहे प्राथमिक शिक्षकों के क्रमिक अनशन को शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने जूस पिलाकर खत्म करवाया। शिक्षकों की मांगों पर सहमति बनने के बाद यह फैसला लिया गया।
शिक्षक मांगों पर कमेटी गठन
शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने बताया कि प्राथमिक शिक्षक संघ की मांगों पर विचार के लिए स्कूल शिक्षा निदेशक आशीष कोहली की अध्यक्षता में एक कमेटी बनाई गई है। इस कमेटी में शिक्षक संघ के पदाधिकारी भी शामिल होंगे। कमेटी जल्द ही शिक्षकों के लंबित मुद्दों पर विस्तार से चर्चा करेगी। ठाकुर ने कहा कि सरकार और संघ के बीच अधिकांश मुद्दों पर सहमति बन गई है।
शिक्षा निदेशालय का ढांचा यथावत
शिक्षा मंत्री ने स्पष्ट किया कि हिमाचल शिक्षक अनशन के बाद उठी मांगों को ध्यान में रखते हुए स्कूल शिक्षा निदेशालय का ढांचा एक ही रहेगा। सरकार ने इस फैसले को वापस लेने से इनकार किया है। पहली से पांचवीं कक्षा और छठी से बारहवीं कक्षा के लिए दो अलग-अलग अतिरिक्त निदेशक नियुक्त किए जाएंगे। इससे प्रशासनिक कार्यों में सुधार होगा और शिक्षकों की समस्याओं का समाधान तेजी से हो सकेगा।
शिक्षकों की प्रमुख मांगें
प्राथमिक शिक्षक संघ ने कई मुद्दों को उठाया था, जिनमें शामिल हैं:
शिक्षा मंत्री ने आश्वासन दिया कि निलंबित शिक्षकों के मामलों पर पुनर्विचार होगा और उनकी पदोन्नति में कोई बाधा नहीं आएगी।
शिक्षा व्यवस्था में सुधार के प्रयास
रोहित ठाकुर ने कहा कि सरकार शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है। हाल ही में 6,000 से अधिक शिक्षकों की भर्ती की गई है, और 3,100 अन्य शिक्षक पदों के लिए भर्ती प्रक्रिया जारी है। इसके अलावा, शिक्षा विभाग को इस वित्तीय वर्ष में 8,950 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया है। ठाकुर ने बताया कि हिमाचल में शिक्षक-छात्र अनुपात 1:11 है, जो देश में सर्वश्रेष्ठ है।
स्कूलों में कम नामांकन की चुनौती
शिक्षा मंत्री ने स्वीकार किया कि प्राथमिक स्कूलों में नामांकन पिछले 20 वर्षों में 50% तक घट गया है। इस समस्या से निपटने के लिए सरकार ने 621 स्कूलों को बंद करने, विलय करने या डाउनग्रेड करने का प्रस्ताव दिया है। 103 स्कूलों को तत्काल बंद करने की मंजूरी दी गई है, जबकि 518 अन्य स्कूलों के लिए प्रस्ताव मुख्यमंत्री को भेजा गया है।
शिक्षकों का हित प्राथमिकता
हिमाचल शिक्षक अनशन के समापन के बाद शिक्षा मंत्री ने कहा कि शिक्षकों का हित सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने शिक्षकों से अपील की कि वे शिक्षण कार्य पर ध्यान दें, ताकि छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके। सरकार ने शिक्षकों की कमी को दूर करने के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षकों को तैनात करने की योजना बनाई है। अधिक जानकारी के लिए हिमाचल प्रदेश शिक्षा विभाग की वेबसाइट देखें।
हिमाचल शिक्षक संघ: राजकीय अध्यापक संघ में गहराया विवाद, दो गुटों में बंटे नेता
Himachal News: हिमाचल प्रदेश में हिमाचल शिक्षक संघ के भीतर गहराया विवाद चर्चा का विषय बन गया है। शिमला में शुक्रवार को दो गुटों के नेताओं, नरोत्तम वर्मा और वीरेंद्र चौहान, ने प्रेस वार्ता कर एक-दूसरे की मान्यता पर सवाल उठाए। इस टकराव से शिक्षकों के मुद्दे सरकार तक नहीं पहुंच पा रहे हैं।
नरोत्तम वर्मा गुट के आरोप
नरोत्तम वर्मा, जो खुद को हिमाचल शिक्षक संघ का मान्यता प्राप्त अध्यक्ष बताते हैं, ने वीरेंद्र चौहान गुट को असंवैधानिक करार दिया। उन्होंने कहा कि चौहान स्वयंभू नेता बनकर राजनीतिक लाभ ले रहे हैं। वर्मा के अनुसार, उनके गुट के पास शिक्षकों का समर्थन है, और वे जल्द ही मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री से मुलाकात करेंगे। वर्मा ने शिक्षकों की लंबित मांगों को उठाया, जिनमें 2016 से बकाया महंगाई भत्ते का एरियर और छठे वेतन आयोग की सिफारिशों के अनुसार भुगतान शामिल हैं।
वीरेंद्र चौहान का पलटवार
वीरेंद्र चौहान ने नरोत्तम वर्मा के दावों को खारिज करते हुए कहा कि हिमाचल शिक्षक संघ का चुनाव 2023 में हुआ था, जो तीन साल के लिए वैध है। उन्होंने वर्मा पर संघ के नाम का दुरुपयोग करने का आरोप लगाया और कहा कि इस मामले में कोर्ट में केस चल रहा है। चौहान ने दावा किया कि निष्कासित सदस्य समाज में भ्रांतियां फैला रहे हैं। उन्होंने पूछा कि अगर वर्मा का गुट वैध है, तो उन्होंने सरकार या अधिकारियों के साथ कितनी बार शिक्षकों के मुद्दों पर चर्चा की।
शिक्षकों की लंबित मांगें
हिमाचल शिक्षक संघ के दोनों गुटों ने शिक्षकों की समस्याओं को उजागर किया। नरोत्तम वर्मा ने कहा कि शिक्षकों की पदोन्नति लंबे समय से रुकी हुई है। जेबीटी से टीजीटी और मुख्य अध्यापक से प्रधानाचार्य की पदोन्नति में देरी से शिक्षकों में असंतोष है। उन्होंने समयबद्ध पदोन्नति को शिक्षा व्यवस्था की गुणवत्ता के लिए जरूरी बताया। इसके अलावा, प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षकों की कमी के कारण छात्रों की संख्या घट रही है। वर्मा ने मांग की कि शिक्षकों से गैर-शिक्षकीय कार्य बंद किए जाएं। अधिक जानकारी के लिए हिमाचल प्रदेश शिक्षा विभाग की वेबसाइट देखें।
शिक्षा बोर्ड अध्यक्ष की नियुक्ति की मांग
नरोत्तम वर्मा ने प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड के नए अध्यक्ष की तत्काल नियुक्ति की मांग की। उन्होंने कहा कि बोर्ड के बिना कई प्रशासनिक निर्णय लंबित हैं, जो शिक्षा व्यवस्था को प्रभावित कर रहे हैं। इसके साथ ही, उन्होंने शिक्षकों के हितों के लिए एकजुट होकर सरकार से बातचीने की जरूरत पर जोर दिया।
आंतरिक विवाद का असर
हिमाचल शिक्षक संघ में चल रहा यह विवाद शिक्षकों के हितों को नुकसान पहुंचा रहा है। दोनों गुटों के बीच आरोप-प्रत्यारोप से शिक्षकों की मांगें पृष्ठभूमि में चली गई हैं। शिक्षकों का कहना है कि यह टकराव उनकी समस्याओं को सरकार तक पहुंचाने में बाधा बन रहा है। वर्मा और चौहान दोनों ने दावा किया कि उनका गुट ही शिक्षकों का सच्चा प्रतिनिधित्व करता है, लेकिन इस विवाद से शिक्षा व्यवस्था पर असर पड़ रहा है।
कोर्ट में चल रहा मामला
वीरेंद्र चौहान ने बताया कि नरोत्तम वर्मा द्वारा संघ के नाम के दुरुपयोग को लेकर कोर्ट में मामला चल रहा है। उन्होंने कहा कि निष्कासित सदस्यों को नया संगठन बनाने की स्वतंत्रता है, लेकिन वे हिमाचल शिक्षक संघ की मान्यता पर सवाल नहीं उठा सकते। इस बीच, शिक्षक समुदाय इस विवाद के जल्द समाधान की उम्मीद कर रहा है, ताकि उनकी मांगों पर ध्यान दिया जा सके।