Justice Sotomayor apologizes to Justice Kavanaugh for public criticism of immigration opinion

Supreme Court Justice Sonia Sotomayor issued a rare public apology Wednesday over what she called "inappropriate" remarks aimed at Justice Brett Kavanaugh for his vote last year to allow aggressive Trump administration immigration enforcement tactics, which critics had called racial profiling. “I had a colleague in that case who wrote, you know, these are only 'temporary stops,'” Sotomayor said at the University of Kansas School of Law last week, referring to Kavanaugh's concurring […]

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California Fines Church $1.2 Million for Worship; Now the Supreme Court Must Decide if the Constitution Still Stands

Advocates for Faith & Freedom, in partnership with the American Center for Law & Justice, has filed a Petition for Writ of Certiorari asking the United States Supreme Court to overturn more than $1.2 million in fines imposed on Calvary Chapel San Jose and Pastor Mike McClure for the simple act of gathering to worship. This case stands as one of the clearest examples of government overreach against a church in modern American history. During COVID, California forced churches to close, restrict […]

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The Story of a Japanese Wallet; Ketanji Brown Jackson’s Japan wallet analogy draws conservative backlash

Liberal Supreme Court Justice Ketanji Brown Jackson faced viral backlash from conservatives over a comment during oral arguments about birthright citizenship where she floated an analogy comparing the issue to stealing a wallet in Japan.  "I was thinking, you know, I’m a U.S. citizen and visiting Japan and what it means is that, you know, if I steal someone’s wallet in Japan, the Japanese authorities can arrest me and prosecute me," Jackson said during Wednesday’s oral arguments […]

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Supreme Court to hear arguments over Trump’s birthright citizenship order today

Washington — The Supreme Court will convene for arguments Wednesday to consider the legality of President Trump's executive order that seeks to end birthright citizenship. The question in the case, known as Trump v. Barbara, is whether the president's directive complies with the 14th Amendment's Citizenship Clause and federal immigration law enacted in 1952. Mr. Trump issued the executive order on the first day of his second term as part of his plans for a sweeping immigration crackdown, […]

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No Kings protests returns

"No Kings" protests returning to cites around the US.

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Supreme Court Seems Open To Taking Away Key Election Rule Beloved By Dems

The Supreme Court seemed open Monday to cracking down on states’ ability to accept mail-in ballots that arrive late. Several justices seemed concerned about the “slippery slope” of counting ballots received after Election Day, raising questions about who can receive ballots and how to address perceptions of fraud. “When do I know whether or not a choice is final?” Justice Clarence Thomas asked Missouri Solicitor General Scott Stewart. Source: Supreme Court Seems Open To Taking […]

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Supreme Court hears oral arguments on November 5, 2025 challenging President Trump's emergency tariffs under the International Emergency Economic Powers Act. Both conservative and liberal justices question the administration's legal authority while small businesses argue Congress controls taxation powers, not the president.

#SupremeCourtOralArguments #TrumpTariffs #CourtCase #SupremeCourtNews

अफसरों पर भारी पड़ा बुलडोजर एक्शन, सुप्रीम कोर्ट ने दिए 25 लाख मुआवजा देने के आदेश; डीएम, एसपी समेत 27 के खिलाफ मामला दर्ज

Supreme Court: महाराजगंज में सड़क के चौड़ीकरण के लिए घरों को बुलडोजर से गिराने की कार्रवाई अब अफसरों पर उल्‍टी पड़ने लगी है। अब तत्‍कालीन डीएम, तत्‍कालीन एडीएम, तत्‍कालीन एडिशनल एसपी, तत्‍कालीन कोतवाल सहित 27 लोगों के खिलाफ केस दर्ज हो गया है। मामले में 26 नामजद आरोपी हैं। केस याचिकाकर्ता मनोज टिबरेवाल की तहरीर के आधार पर महाराजगंज की कोतवाली में दर्ज हुआ है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने यूपी सरकार को याचिकाकर्ता को 25 लाख रुपए अंतरिम मुआवजा देने का भी निर्देश दिया था।

छह नवंबर 2024 को तत्‍कालीन मुख्य न्यायाधीश डी.वाई. चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला और मनोज मिश्रा की पीठ ने कहा था कि प्रक्रिया का पालन किए बगैर किसी के घरों में घुसना, तोड़ना अराजकता है। पीठ ने सड़कें चौड़ी करने एवं अतिक्रमण हटाने के लिए अपनाई जाने वाली प्रक्रिया पर सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश जारी करते हुए यह टिप्पणी की थी। पीठ ने यूपी सरकार को महराजगंज के हामिद नगर इलाके में 2019 में सड़क चौड़ी करने के लिए घरों को तोड़े जाने के मसले पर पीड़ित मनोज टिबरेवाल की ओर से भेजे पत्र पर 2020 में स्वत: संज्ञान लेकर शुरू किए गए मामले में यह आदेश दिया था।

कोर्ट ने सड़क चौड़ा करने के लिए उचित प्रक्रिया का पालन किए बगैर लोगों के घरों को तोड़े जाने पर यूपी सरकार को कड़ी फटकार लगाई थी। शीर्ष अदालत ने इसे गंभीरता से लेते हुए महराजगंज में लोगों के घरों को तोड़ने के लिए अधिकारियों द्वारा की गई कार्रवाई को अत्याचारी कृत्य और अवैध बताते हुए कहा था कि आप (राज्य सरकार) रातों-रात लोगों के घरों को बुलडोजर से नहीं गिरा सकते।

सुनवाई के दौरान जस्टिस पारदीवाला ने यूपी सरकार से कहा था कि आप घर में रहने वाले लोगों को खाली करने का समय नहीं देते, घरेलू सामानों का क्या? किसी भी तरह की कार्रवाई के लिए उचित प्रक्रिया का पालन होना चाहिए। सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार के वकील ने कहा कि लोगों ने सार्वजनिक भूमि पर अतिक्रमण किया था। इस पर तत्‍कालीन मुख्य न्यायाधीश चंद्रचूड़ ने कहा कि आप कहते हैं कि वह 3.7 वर्गमीटर का अतिक्रमणकर्ता था, हम इसे सुन रहे हैं, लेकिन आप इस बारे में कोई प्रमाण नहीं दे रहे हैं। मुख्य न्यायाधीश ने कहा था कि तथ्यों से साफ पता चलता है कि कार्रवाई करने से पहले कोई नोटिस जारी नहीं किया गया था, आप केवल साइट पर गए थे और लोगों को सूचित किया था। हम इस मामले में दंडात्मक मुआवजा देने के इच्छुक हो सकते हैं। क्या इससे न्याय का उद्देश्य पूरा होगा। सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार के वकील ने कहा कि कार्रवाई में 123 अवैध निर्माण थे।

इस पर जस्टिस पारदीवाला ने यूपी सरकार से कहा कि आप यह किस आधार पर कह रहे हैं कि लोगों का घर अवैध था? आपने 1960 से क्या किया है? पिछले 50 साल से आप क्या कर रहे थे? बहुत अहंकारी, राज्य सरकार को राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के आदेशों का कुछ सम्मान करना होगा, आप चुपचाप बैठे हैं और एक अधिकारी के कार्यों की रक्षा कर रहे हैं।

केवल ढोल बजाकर घर खाली करने को नहीं कह सकते

जस्टिस पारदीवाला ने राज्य सरकार के वकील से कहा था कि आपके अधिकारी ने पिछली रात सड़क चौड़ीकरण के लिए पीले निशान वाली जगह को तोड़ दिया, अगले दिन सुबह आप बुलडोजर लेकर आ गए। उन्होंने कहा कि यह पूरी तरह से मनमानापूर्ण कार्रवाई है, आप केवल मौके पर गए और लाउडस्पीकर के माध्यम से लोगों को सूचित किया। आप केवल ढोल बजाकर लोगों को घर खाली करने और उन्हें ध्वस्त करने के लिए नहीं कह सकते। उचित सूचना होनी चाहिए। पीठ ने एनएचआरसी की जांच रिपोर्ट पर गौर किया था, जिसमें खुलासा हुआ कि ध्वस्तीकरण की कार्रवाई कथित अतिक्रमण से कहीं अधिक व्यापक थी।

सुप्रीम कोर्ट ने मुख्‍य सचिव को दिया था कार्रवाई का आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए यूपी के मुख्य सचिव को अवैध तरीके से लोगों के घरों को तोड़ने के पूरे मामले की जांच करने का आदेश दिया था। पीठ ने मुख्य सचिव को अधिकारियों और ठेकेदारों की भूमिका की जांच कर सभी पर अनुशासनात्मक कार्रवाई करने का आदेश दिया था। कोर्ट ने न सिर्फ याचिकाकर्ता मनोज टिबरेवाल बल्कि अन्य लोगों के घर को तोड़े जाने की कार्रवाई की जांच करने और एक महीने में रिपोर्ट पेश करने को कहा था। पीठ ने यूपी सरकार को जांच के बाद कानून की प्रक्रिया के उल्लंघन में कार्यों की जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए अधिकारियों और ठेकेदारों के खिलाफ आपराधिक प्रकृति की कार्रवाई सहित उचित कार्रवाई करने का आदेश दिया था।

फरेंदा रोड पर 100 से अधिक मकानों में हुई थी तोड़फोड़

सड़क चौड़ीकरण के दौरान वर्ष 2019 में महराजगंज में सौ से अधिक मकानों-दुकानों में तोड़फोड़ हुई थी। कई मकानों पर प्रशासन का बुलडोजर चला था तो बहुतों ने खुद ही अपना आशियाना तोड़कर अतिक्रमण की जद से बाहर आने की कोशिश की थी। महराजगंज शहर के फरेंदा रोड का 2019 में चौड़ीकरण हो रहा था। सड़क के दोनों किनारों पर नाले के साथ साइड रोड बनाने का काम शुरू हुआ था। शहर के मुख्य चौराहे से लेकर जिला मुख्यालय तक सौ से अधिक मकान व दुकान दोनों ओर चिह्नित किए गए जो अतिक्रमण की जद में आ रहे थे। एनएचएआई ने मकानों व दुकानों पर लाल मार्क लगाए। शुरुआत में एक-दो मकानों का अतिक्रमण जेसीबी से हटवाया गया तो बहुतों ने खुद मजदूर लगाकर मकानों को तोड़वाया।

इसी बीच मुख्य चौराहे पर स्थित पत्रकार मनोज टिबड़ेवाल के मकान को 13 सितंबर-2019 को जेसीबी लगाकर तोड़ा गया था। इस मामले में मनोज टिबड़ेवाल का कहना है कि उनके दादा ने 1960 में बैनामें में यह जमीन खरीदी थी। जिला प्रशासन ने उनके मकान को गिरवा दिया था और 123 लोगों के मकान दहशत फैलाकर खुद तुड़वा दिए गए। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने जबरन अवैध तरीके से मकान गिराने की बात कहते हुए राज्य सरकार को तत्काल 25 लाख का अंतरिम मुआवजा देने का आदेश दिया है। सभी दोषियों के खिलाफ जांच का आदेश हुआ है और एक महीने के अंदर सभी दोषियों के खिलाफ क्रिमिनल और विभागीय कार्रवाई भी करने को कहा है। कहा कि इस फैसले से सभी को मुआवजा मिलने का रास्ता साफ हुआ है।

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डल्लेवाल का आमरण अनशन 36वें दिन में कर गया प्रवेश, सुप्रीम कोर्ट में होगी सुनवाई; आज किसानों से बात करेगा पैनल

Dallewal fast unto death: किसान संगठनों ने सोमवार को 9 घंटे के बंद का आह्वान किया था। किसानों के आंदोलन के चलते सोमवार को कुछ घंटों के लिए पंजाब की रफ्तार थम गई। किसान मंजदूर मोर्चा और संयुक्त किसान मोर्चा गैरराजनीतिक ने बंद का ऐलान किया था। वहीं आज सुप्रीम कोर्ट आमरण अनशन पर बैठे किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल के स्वास्थ्य को लेकर सुनवाई करने वाला है। डल्लेवाल पिछले 35 दिनों से भूख हड़ताल कर रहे हैं। उन्होंने अस्पताल में इलाज करवाने से इनकार कर दिया है। पिछली सुनवाई में भी सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब सरकार का फटकार लगाते हुए कहा था कि उन्हें किसी तरह इलाज के लिए मनाया जाए।

वहीं सुप्रीम कोर्ट द्वारा बनाया गया पैनल भी 3 जनवरी को किसानों से बात करने वाला है। सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट के पूर्व जज नवाब सिंह की अध्यक्षता में पैनल बनाया था। पैनल ने किसानों को वर्चुअल मीटिंग के लिए न्योता भेज दिया है। पैनल में हरियाणा के पूर्व डीजीपी बीएस संधू, कृषि एक्सपर्ट देविंदर शर्मा, प्रोफेसर रंजीत सिंह घुम्मन और पंजाब कृषि विश्वविद्यालय लुधियाना के प्रोफेसर डॉ. सुखपाल सिंह शामिल हैं।

किसान प्रतिनिधियों ने कन्फर्म किया है कि उन्हें 3 जनवरी को बातचीत करने का न्योता मिला है। कमेटी बनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि किसानों से बात करके उनकी समस्याओं को सुना जाए और उनसे हाइवे के पास से ट्रैक्टर. ट्रॉली और टेंट हटाने का आग्रह किया जाए। बेंच ने कहा था, हमें लगता है कि किसानों को विश्वास में लेना सबसे ज्यादा जरूरी है। बिना देरी के शंभू बॉर्डर और हाइवे से किसानों को हटाने के लिए कमेटी जो भी सुझाव देगी उसपर गंभीरता से विचार किया जाएगा। इससे आम जनता को भी बड़ी राहत मिलेगी। इसके अलावा किसानों को भी राजनीतिक दलों से दूरी बनाकर रखनी चाहिए।

बता दें कि सोमवार को सुबह 7 बजे से शाम के 4 बजे तक पंजाब में कई जगहों पर बंद काअसर दिखाई दिया। वंदेभारत सहित 172 ट्रेनों को रद्द कर दिया गया। वहीं 232 ट्रेनें प्रभावित हुईं। बड़ी संख्या में दुकानें और कारखाने भी बंद रहे। केकेएम और एसकेएम एनपी ने भी इस बंद का समर्थन किया। केकेयू के प्रेसिडेंट दर्शन पाल सिंह ने कहा. हमारे किसानों ने भी 12 जिलों में बंद का समर्थन किया। हम शंभू बॉर्डर और खनौरी बॉर्डर पर बैठे किसानों की मांगों का समर्थन करते हैं।

डल्लेवाल ने इलाज से किया इनकार

अनशन कर रहे किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल को अस्पताल ले जाने के लिए उच्चतम न्यायालय की समय सीमा तेजी से नजदीक आने के बीच सोमवार को पंजाब सरकार ने डल्लेवाल को चिकित्सा सहायता लेने के लिए मनाने के प्रयास तेज कर दिए। हालांकि, उन्होंने फिर से इनकार कर दिया।पिछले कुछ दिनों में पूर्व अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक जसकरण सिंह के नेतृत्व में राज्य सरकार की एक टीम ने डल्लेवाल को चिकित्सा सहायता लेने के लिए मनाने के कई प्रयास किए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में पंजाब सरकार को डल्लेवाल को अस्पताल में भर्ती कराने के लिए 31 दिसंबर तक का समय दिया है, साथ ही राज्य सरकार को आवश्यकता पड़ने पर केंद्र से सहायता लेने की भी छूट दी है।

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रिश्तेदार नहीं बनेंगे सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के जज, कॉलेजियम प्रक्रिया में होगा बड़ा बदलाव, जानें क्या है कारण

Delhi News: उच्च न्यायालयों और सुप्रीम कोर्ट में जजों की नियुक्ति को लेकर ऐसी धारणा अकसर बनाई जाती रही है कि पहली पीढ़ी के वकीलों को चयन प्रक्रिया में तवज्जो नहीं दी जाती। इसकी बजाय ऐसे लोगों को जज के तौर पर प्रमोट किया जाता है, जो दूसरी पीढ़ी के वकील हों और उनके परिजन पहले से जज हों। अब इस धारणा को खत्म करने की पहल कॉलेजियम की ओर से हो सकती है। अब कहा जा रहा है कि कॉलेजियम ऐसे लोगों के नामों को आगे बढ़ाने से परहेज करेगा, जिनकी परिजन या रिश्तेदार पहले से हाई कोर्ट या फिर उससे उच्चतम न्यायालय के जज हों। यदि ऐसा हुआ तो फिर जजों का चयन करने वाली कॉलेजियम की प्रक्रिया में यह बड़ा बदलाव होगा। बता दें कि जजों में ऐसे लोगों की बड़ी संख्या है, जिनका कोई फैमिली मेंबर या फिर रिश्तेदार पहले भी लीगल प्रोफेशन से जुड़े रहे हैं।

जानकारी मिली है कि कॉलेजिमय में शामिल कुछ जजों का ही प्रस्ताव था कि ऐसे लोगों के नामों को आगे न बढ़ाया जाए, जिनके परिजन या रिश्तेदार पहले से जज हैं या फिर रह चुके हैं। इस बारे में जब मंथन हुआ तो यह बात भी उठी कि इस तरह का फैसला लेने से तो कुछ ऐसे लोग भी छंट जाएंगे, जो योग्य हैं। इस पर कॉलेजियम में ही दलील दी गई कि ये लोग एक सफल वकील के तौर पर अच्छी जिंदगी गुजार सकते हैं। इन लोगों के पास पैसे कमाने के अवसरों की भी कमी नहीं होगी। भले ही कुछ लोगों के लिए यह नुकसानदायक होगा, लेकिन व्यापक हित में यह फैसला गलत नहीं है। क़ॉलेजियम की ओर से खुद ही इस तरह का फैसला लेना मायने रखता है क्योंकि सुप्रीम कोर्ट की 5 जजों की संवैधानिक बेंच ने 2015 में राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग को खारिज कर दिया था।

इस संस्था के गठन से जुड़े कानून को सरकार ने संसद से सर्वसम्मति से पारित करा लिया था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने उस पर रोक लगा दी थी। ऐसे में अब कॉलेजियम की ओर से खुद ही जजों की नियुक्ति प्रक्रिया सुधार का प्रस्ताव लाना अहम है। दरअसल सुप्रीम कोर्ट में तब NJAC को खारिज किया गया था, तब उसका पक्ष रखते हुए एक वकील ने परिवारवाद वाली दलील दी थी। वकील का कहना था कि ऐसी भावना लोगों के मन में है कि कॉलेजियम सिस्टम में जज ही जज को चुनते हैं। यह ऐसा ही है कि आप मेरी पीठ खुजलाएं और मैं आपकी। इसके माध्यम से कई बार ऐसे लोग ही चुने जाते हैं, जिनके परिवारों के लोग पहले से ही न्यायिक व्यवस्था में बैठे हैं। एक वकील ने कहा था कि ऐसे 50 फीसदी जज हाई कोर्ट में हैं, जिनके परिजन पहले से ही अदालत में थे।

माना जा रहा है कि उस धारणा को तोड़ने के लिए कॉलेजियम में बदलाव की व्यवस्था की जा रही है। हालांकि अभी यह महज एक प्रस्ताव ही है। इस पर अमल होने में अभी वक्त लगेगा। बता दें कि कॉलेजियम सिस्टम की आलोचना भी कई बार सरकार की ओर से की जाती रही है। इसके अलावा सिविल सोसाय़टी में भी कॉलेजियम सिस्टम की खामियों पर चर्चा होती रही है। गौरतलब है कि कॉलेजियम सिस्टम में एक और सुधार हाल ही में देखने को मिला है। अब कॉलेजियम में शामिल जज नियुक्ति से पहले संबंधित लोगों से मुलाकात भी कर रहे हैं और इंटरव्यू आदि लेते हैं।

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