सहोदरन अय्यप्पन जी के परिनिर्वाण दिवस पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि!

“कोई जाति नहीं, कोई धर्म नहीं और कोई ईश्वर नहीं। केवल आचरण, आचरण और आचरण; उपयुक्त और यथोचित।” -सहोदरन अय्यप्पन
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