कांग्रेस संगठन: हिमाचल में राहुल गांधी की घोड़ा नीति ने मचाया बवाल, सोशल मीडिया पर हुआ नेताओं का वर्गीकरण
Himachal News: कांग्रेस संगठन को मजबूत करने के लिए राहुल गांधी ने 3 जून 2025 को भोपाल में नेताओं को तीन श्रेणियों में बांटा: रेस, बारात और लंगड़े घोड़े। राहुल गांधी के बयान के बाद सोशल मीडिया पर बवाल मच गया है। सोशल मीडिया पर राहुल गांधी की टिप्पणी के आधार पर हिमाचल कांग्रेस के नेताओं की लिस्ट खूब वायरल हो रही है। यूजर नेताओं को तीन कैटगरी में बांटकर कांग्रेस नेताओं की खूब खिंचाई कर रहे हैं। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू और विक्रमादित्य सिंह जैसे नेता रेस के घोड़े माने गए, जो सक्रिय और प्रभावी हैं। वहीं, कुछ वरिष्ठ नेताओं की निष्क्रियता और 2024 के राज्यसभा संकट में बागी रुख ने संगठन को कमजोर किया।
राहुल गांधी की घोड़ा नीति
राहुल गांधी ने कांग्रेस संगठन को पुनर्जनन के लिए नेताओं को तीन श्रेणियों में बांटा। रेस के घोड़े जीत दिलाने वाले, सक्रिय और प्रभावी हैं। बारात के घोड़े क्षेत्रीय प्रभाव रखते हैं, लेकिन उनकी सक्रियता सीमित है। लंगड़े घोड़े निष्क्रिय या अनुशासनहीन हैं, जिन्हें रिटायर करने की बात कही गई। यह नीति हिमाचल में 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारी के लिए लागू हो रही है।
रेस के घोड़े: संगठन के मजबूत स्तंभ
हिमाचल में रेस के घोड़े सक्रिय और प्रभावशाली हैं। इनमें शामिल हैं:
- सुखविंदर सिंह सुक्खू (मुख्यमंत्री, नादौन): 2022 में जीत के सूत्रधार, राहुल के करीबी।
- विक्रमादित्य सिंह (लोक निर्माण मंत्री, शिमला ग्रामीण): युवा, 2024 मंडी लोकसभा प्रत्याशी।
- मुकेश अग्निहोत्री (उप-मुख्यमंत्री, हरोली): पांच बार विधायक, संगठन में सक्रिय।
- रोहित ठाकुर (शिक्षा मंत्री, जुब्बल-कोटखाई): चार बार विधायक, प्रभावी।
- अनिरुद्ध सिंह (ग्रामीण विकास मंत्री, कसुम्पटी): सरकार में सक्रिय।
- हर्षवर्धन चौहान (उद्योग मंत्री, शिलाई): छह बार विधायक, अनुभवी।
- जगत सिंह नेगी (राजस्व और बागवानी मंत्री, किन्नौर): अनुसूचित जनजाति सीट से जीत।
- चंद्रकुमार (कृषि और पशुपालन मंत्री, जवाली): ओबीसी चेहरा, सक्रिय।
- चंद्रशेखर (धर्मपुर): बीजेपी के दिग्गज को हराया, तेज-तर्रार।
- यादवेन्द्र गोमा (जयसिंहपुर, कैबिनेट मंत्री): सरकार में प्रभावी।
- राजेश धर्माणी (घुमारवीं, कैबिनेट मंत्री): 2024 में वफादार।
- रघुवीर सिंह बाली (नगरोटा): जीएस बाली के पुत्र, संगठन में सक्रिय।
- विनय कुमार (श्री रेणुका जी, विधानसभा उपाध्यक्ष): प्रभावी भूमिका।
- कुलदीप सिंह पठानिया (भटियात, विधानसभा अध्यक्ष): 2024 में बागियों को अयोग्य कर सरकार बचाई।
बारात के घोड़े: क्षेत्रीय प्रभाव, सीमित सक्रियता
ये नेता क्षेत्रीय स्तर पर प्रभाव रखते हैं, लेकिन उनकी सक्रियता सीमित है:
- प्रतिभा सिंह (प्रदेश अध्यक्ष, मंडी सांसद): वीरभद्र सिंह की पत्नी, संगठन पुनर्गठन में देरी की आलोचना।
- कुलदीप सिंह राठौर (पूर्व प्रदेश अध्यक्ष, ठियोग): आनंद शर्मा के करीबी, कम सक्रिय।
- कर्नल धनीराम शांडिल (स्वास्थ्य और सामाजिक न्याय मंत्री, सोलन): उम्र के कारण सीमित सक्रियता।
- कौल सिंह ठाकुर (द्रंग, पूर्व विधायक): 2022 में हार, सीमित प्रभाव।
- राम लाल (श्री नयना देवी, पूर्व विधायक): 2022 में हार, कम सक्रिय।
- आशा कुमारी (डलहौजी, पूर्व विधायक): 2022 में हार, प्रभाव कम।
- सुंदर ठाकुर (कुल्लू, पूर्व मुख्य संसदीय सचिव): क्षेत्रीय प्रभाव।
- कमलेश ठाकुर (देहरा): सुक्खू की पत्नी, 2024 उपचुनाव जीतीं, प्रभाव स्थापित नहीं।
- विनोद सुल्तानपुरी (कसौली): क्षेत्रीय प्रभाव, संगठन में सीमित।
- प्रकाश चौधरी (बल्ह, पूर्व विधायक): 2022 में हार, कम सक्रिय।
- बंबर ठाकुर (बिलासपुर, पूर्व विधायक): 2025 में गोलीबारी की घटना में घायल।
लंगड़े घोड़े: निष्क्रियता और अनुशासनहीनता
ये नेता निष्क्रिय या अनुशासनहीन हैं, विशेष रूप से 2024 के राज्यसभा संकट में:
- आनंद शर्मा: वरिष्ठ नेता, निष्क्रियता और नकारात्मक संदेश।
- विप्लव ठाकुर: पूर्व राज्यसभा सांसद, बागी रुख।
- रंगीला राम राव: सरकाघाट, पूर्व विधायक, उम्रदराज।
- नंद लाल: रामपुर, बीमार, पार्टी को नुकसान।
- किशोरी लाल: आनी, बागी।
- पवन ठाकुर: सरकाघाट, पूर्व प्रत्याशी, हारा हुआ।
- नरेश चौहान: नाचन, पूर्व प्रत्याशी, निष्क्रिय।
- चेतराम ठाकुर: तीन बार हार, कोई प्रभाव नहीं।
- चंपा ठाकुर: लगातार हार, निष्क्रिय।
- सोहनलाल: सुंदरनगर, दो बार हार, प्रभावहीन।
संगठन सृजन और भविष्य की रणनीति
राहुल गांधी का संगठन सृजन अभियान हिमाचल में गति पकड़ रहा है। 61 पर्यवेक्षक जून 2025 में नेताओं की सक्रियता का मूल्यांकन करेंगे। नई जिला कमेटियां बनेंगी। 2024 में बागी विधायकों के कारण सरकार संकट में आई थी, लेकिन विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने स्थिति संभाली। यह नीति कांग्रेस संगठन को 2027 चुनाव के लिए तैयार करेगी।
हिमाचल में कांग्रेस की ताकत रेस के घोड़ों पर निर्भर है। संगठन में अनुशासन और सक्रियता बढ़ाने की यह रणनीति पार्टी की दिशा तय करेगी।
Source: Social Media(Facebook)
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