एफ-35 फाइटर जेट: भारत पर अमेरिकी दबाव, चीन की रेयर अर्थ निर्भरता से बढ़ रहा खतरा, जानें पूरा मामला
India News: अमेरिका भारत को एफ-35 फाइटर जेट बेचने के लिए दबाव डाल रहा है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसे भारत की सैन्य ताकत बढ़ाने का जरिया बताया। लेकिन विशेषज्ञों ने चेतावनी दी कि चीन की रेयर अर्थ आपूर्ति पर निर्भरता इस जेट को बेकार कर सकती है। भारत के लिए यह डील जोखिम भरी हो सकती है। रूस ने सुखोई-57 का आकर्षक ऑफर दिया है।
एफ-35 पर अमेरिका का जोर
एफ-35 फाइटर जेट को अमेरिका भारत के लिए गेम-चेंजर बता रहा है। ट्रंप ने फरवरी 2025 में पीएम मोदी के साथ मुलाकात में इसकी पेशकश की। यह पांचवीं पीढ़ी का स्टील्थ जेट है, जो जापान, इजराइल और नाटो देशों के पास है। लेकिन भारत ने अभी कोई औपचारिक प्रक्रिया शुरू नहीं की। उच्च लागत और तकनीकी जोखिम इसे विवादास्पद बनाते हैं।
चीन की रेयर अर्थ ताकत
चीन की रेयर अर्थ आपूर्ति एफ-35 फाइटर जेट के लिए बड़ा खतरा है। इंडिया टुडे के अनुसार, अमेरिका का रक्षा उद्योग 80% रेयर अर्थ के लिए चीन पर निर्भर है। एक जेट बनाने में 400 किलो रेयर अर्थ लगता है। चीन अगर आपूर्ति रोके, तो एफ-35, क्रूज मिसाइल और रडार बेकार हो सकते हैं। गैलियम और मैग्नीशियम पर भी चीन का दबदबा है।
भारत के लिए जोखिम
एफ-35 फाइटर जेट खरीदने से भारत को रणनीतिक नुकसान हो सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि चीन की रेयर अर्थ पकड़ इसे निष्क्रिय कर सकती है। एलन मस्क ने इसे “कबाड़” और महंगा बताया। भारत की वायुसेना को 114 मल्टी-रोल फाइटर जेट चाहिए। लेकिन 80 मिलियन डॉलर प्रति जेट की कीमत और रखरखाव लागत भारत के लिए चुनौती है।
रूस का सुखोई-57 ऑफर
रूस ने भारत को सुखोई-57 बनाने का आकर्षक प्रस्ताव दिया। यह एफ-35 फाइटर जेट का विकल्प हो सकता है। रूस ने सोर्स कोड और स्थानीय उत्पादन की पेशकश की, जो “मेक इन इंडिया” से मेल खाता है। भारत पहले से रूसी हथियारों का बड़ा खरीदार है। सुखोई-57 की लागत कम और तकनीकी हस्तांतरण से भारत को फायदा हो सकता है।
स्वदेशी विकल्प और भविष्य
भारत अपने स्वदेशी स्टील्थ जेट AMCA पर काम कर रहा है। एफ-35 फाइटर जेट की तुलना में AMCA लागत प्रभावी और स्वतंत्र होगा। भारत की रणनीति रूस और स्वदेशी तकनीक पर केंद्रित है। रॉयटर्स के अनुसार, रूसी डील से अमेरिका के साथ तनाव बढ़ सकता है। लेकिन भारत अपनी रक्षा जरूरतों को प्राथमिकता देगा।