‘माँ-बहन से अलंकृत शब्दावली’ माने क्या?
‘माँ दी-बहन दी कर दी’ माने क्या?
माँ-बहन, माँ-बहन...
बाप-भाई, बाप-भाई...
क्यों नहीं करते?
वैसे, पत्रकारिता में हिन्दू-मुसलमान, हिन्दू-मुसलमान करते रहेंगे तो यह समझ में नहीं आयेगा.
ख़्याल रखें. माँ-बहन को याद करें और सोचें ज़रूर.
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RT @SushantBSinha
17वें ओवर तक मां-बहन से अलंकृत शब्दावली का भंडार झेल रहे तेवतिया ने 18वें ओवर में पंजाब की माँ दी-बहन दी कर दी। गजबे है। 😂
#RRvKXIP
https://twitter.com/SushantBSinha/status/1310274080386347008