पूर्व जस्टिस नरीमन को सुप्रीम कोर्ट के वकील दीपक साईं का तीखा जवाब, जानें राम मंदिर के बारे क्या कहा
Delhi News: पूर्व जस्टिस आर.एफ. नरीमन ने हाल ही में राम मंदिर को लेकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर सवाल उठाए थे। उन्होंने यहां तक कह दिया था कि बाबरी मस्जिद के नीचे राम मंदिर के अवशेष नहीं मिले थे। उनके इस फैसले पर तीखी प्रतिक्रिया हुई थी, वहीं कुछ लोगों ने इसका समर्थन भी किया था। जब पूर्व चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ से इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि नरीमन अब जज की हैसियत से नहीं बोल रहे हैं। वह आजाद भारत के आजाद नागरिक हैं। इस आधार पर उन्हें कुछ भी कहने का अधिकार है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट अपने फैसले में हर पहलू पर विचार करता है।
उन्होंने कहा कि जस्टिस नरीमन के बयान पर प्रतिक्रिया देना मेरा कर्तव्य नहीं है। अब इस मामले में एक्टिविस्ट वकील के तौर पर मशहूर जे. साई दीपक ने भी बयान दिया है। उन्होंने एएनआई को दिए इंटरव्यू में इस बारे में विस्तार से बात की और जस्टिस नरीमन पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा, ‘एक संस्था का व्यक्ति यह कह रहा है कि मेरे जाने के बाद इसमें गिरावट आई है, यह दुखद है और कई बातें स्पष्ट करता है। यह कहना गलत है कि विवादित स्थल के नीचे कोई मंदिर नहीं मिला। यह कहना गलत था। जजमेंट पढ़िए। इलाहाबाद हाईकोर्ट का जजमेंट पढ़िए और फिर सुप्रीम कोर्ट का जजमेंट पढ़िए। उसमें लिखा है कि जब गुरु नानक वहां आए तो वहां मंदिर था और फिर जब कुछ साल बाद आए तो वहां मंदिर नहीं था। वहां क्या हुआ? कोई आपदा आई जिसमें मंदिर खत्म हो गया।’
उन्होंने कहा कि आपने पीढ़ियों के मन में अपनी संस्कृति को लेकर हीन भावना पैदा कर दी है। जब हाईकोर्ट ने खुदाई का आदेश दिया तो दूसरे पक्ष ने इसका कड़ा विरोध किया। उन्होंने कहा कि इसकी क्या जरूरत थी। इतना डर क्यों था? इसकी एक वजह थी। मस्जिद के खंभे खुद ही बता रहे थे कि वे मंदिर का हिस्सा थे। उन्होंने कहा कि बाबरी और राम मंदिर का विवाद आज का नहीं है और लंबी सुनवाई के दौरान कोर्ट में सब कुछ पेश किया गया। मेरा सवाल यह है कि ऐसे मामलों में दूसरा पक्ष खून-खराबे की बात क्यों करता है। कोर्ट है और आप वहां जाकर अपनी दलील रख सकते हैं। न्यायिक कार्यवाही के जवाब में पत्थरबाजी क्यों जरूरी है?
कितने मंदिर खोजे जाएंगे? इस सवाल पर दीपक साईं ने क्या कहा
कितने मंदिर खोजे जाएंगे? इस सवाल पर जे दीपक साईं ने कहा कि हम यह नहीं कहेंगे कि गली-गली में मंदिर ढूंढ़े जाएं, लेकिन मेरा मानना है कि मथुरा, काशी में सर्वे होना चाहिए। इसके अलावा शक्तिपीठों और ज्योतिर्लिंगों के लिए भी ऐसा किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि विष्णु शंकर जैन और उनके पिता हरि शंकर जैन ने इन मामलों में शानदार काम किया है। हमें ऐसे लोगों की ज्यादा से ज्यादा जरूरत है। विष्णु जैन इस काम में पूरी तरह लगे हुए हैं।
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