मोहर्रम जुलूस: दरोगा ने धार्मिक नेता के फोटो पर चलाई लाठी, जंजीर को बताया हथियार; शिया समुदाय में फैला आक्रोश
Uttar Pradesh News: उत्तर प्रदेश के बहराइच में मोहर्रम जुलूस के दौरान रविवार शाम विवाद छिड़ गया। नानपारा में यौमे आशूरा के जुलूस में शिया समुदाय ने ईरानी धार्मिक नेता के पोस्टर प्रदर्शित किए। आरोप है कि एक पुलिस दारोगा ने पोस्टर पर लाठी मारी और मातम की जंजीर को हथियार बताया। इससे नाराज समुदाय ने प्रदर्शन शुरू कर दिया। पुलिस ने स्थिति को शांत कराया और जांच का आश्वासन दिया।
जुलूस में तनाव की शुरुआत
रविवार शाम 6:30 बजे नानपारा में शिया समुदाय का यौमे आशूरा जुलूस निकल रहा था। जुलूस में लोग अपने धार्मिक नेता के पोस्टर लेकर मातम कर रहे थे। तभी राजा बाजार चौकी के दारोगा पर पोस्टर को लाठी से मारने का आरोप लगा। समुदाय के मुस्तफा अली और अरशद सिद्दीकी ने बताया कि पुलिस ने जंजीर को हथियार कहकर अपमान किया। इससे जुलूस रुक गया और माहौल तनावपूर्ण हो गया।
पुलिस का व्यवहार और प्रदर्शन
शिया समुदाय ने पुलिस के व्यवहार पर कड़ा ऐतराज जताया। प्रदर्शनकारियों ने चौकी इंचार्ज को हटाने की मांग की। गुस्साए लोगों ने गली में प्रदर्शन शुरू कर दिया। स्थानीय लोगों का कहना है कि पुलिस ने धार्मिक भावनाओं का सम्मान नहीं किया। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए भारी पुलिस बल तैनात किया गया। प्रदर्शनकारियों का गुस्सा देखकर वरिष्ठ अधिकारियों को मौके पर पहुंचना पड़ा। यह घटना समुदाय के लिए बेहद दुखद थी।
प्रशासन का हस्तक्षेप
सूचना मिलते ही एसडीएम लालधर यादव और सीओ नानपारा प्रद्युम्न सिंह मौके पर पहुंचे। उन्होंने प्रदर्शनकारियों से बात की और तीन दिन में कार्रवाई का भरोसा दिलाया। करीब 45 मिनट तक जुलूस रुका रहा। प्रशासन के आश्वासन के बाद लोग शांत हुए और जुलूस आगे बढ़ा। सीओ प्रद्युम्न सिंह ने कहा कि पुलिस केवल भीड़ को नियंत्रित कर रही थी। इस घटना ने स्थानीय लोगों में चर्चा का माहौल बना दिया।
शिया समुदाय की भावनाएं
शिया समुदाय के लिए यौमे आशूरा बेहद पवित्र दिन है। इस जुलूस में लोग हजरत इमाम हुसैन की शहादत को याद करते हैं। पोस्टर और जंजीर मातम की परंपरा का हिस्सा हैं। समुदाय का कहना है कि पुलिस का व्यवहार उनकी धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला था। एक युवक ने कहा, “हमारी आस्था का अपमान असहनीय है।” इस घटना ने समुदाय में गहरी नाराजगी पैदा की है।
पुलिस का पक्ष
सीओ प्रद्युम्न सिंह ने बताया कि पुलिस का मकसद केवल व्यवस्था बनाए रखना था। उन्होंने दारोगा के खिलाफ लगे आरोपों की जांच का वादा किया। पुलिस ने कहा कि जुलूस शांतिपूर्ण ढंग से पूरा हुआ। वरिष्ठ अधिकारियों ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि किसी की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने का इरादा नहीं था। फिर भी, समुदाय के गुस्से ने स्थिति को जटिल बना दिया।
विवाद का वीडियो वायरल
घटना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। इसमें प्रदर्शनकारी दारोगा के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते दिखे। वीडियो में लोग अपनी नाराजगी जाहिर कर रहे थे। इससे घटना ने और तूल पकड़ा। स्थानीय लोगों ने पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाए। इस वीडियो ने मोहर्रम जुलूस विवाद को और चर्चा में ला दिया। पुलिस ने अब इस मामले की गहन जांच शुरू कर दी है।
शांति की अपील
प्रशासन ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है। वरिष्ठ अधिकारियों ने कहा कि मामले की निष्पक्ष जांच होगी। उन्होंने समुदाय से धैर्य रखने को कहा। जुलूस के बाद स्थिति सामान्य हो गई, लेकिन स्थानीय लोग अभी भी सतर्क हैं। यह घटना धार्मिक संवेदनशीलता और पुलिस की जवाबदेही पर सवाल उठाती है। प्रशासन अब भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कदम उठाने की बात कर रहा है।