जब हम बूंद का महत्व समझ लेते हैं, तो सागर भी दूर नहीं रहता।
परिवर्तन की शुरुआत बाहर नहीं, हमारे भीतर से होती है।
हिमांशु जोशी के लेखन में झलकती है समाज, साहित्य और आत्मचिंतन की गहराई। ✍️
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