हर तरफ़ हर जगह बे-शुमार आदमी
फिर भी तन्हाइयों का शिकार आदमी

सुब्ह से शाम तक बोझ ढोता हुआ
अपनी ही लाश का ख़ुद मज़ार आदमी

हर तरफ़ भागते दौड़ते रास्ते
हर तरफ़ आदमी का शिकार आदमी

रोज़ जीता हुआ रोज़ मरता हुआ
हर नए दिन नया इंतिज़ार आदमी

घर की दहलीज़ से गेहूं के खेत तक
चलता फिरता कोई कारोबार आदमी

ज़िंदगी का मुक़द्दर सफ़र-दर-सफ़र
आख़िरी सांस तक बे-क़रार आदमी

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बच्चा बोला देख कर, मस्जिद आलीशान,
अल्ला तेरे एक को, इतना बड़ा मकान
#NidaFazli
घर से मस्जिद है बहुत दूर, चलो यूँ कर लें
किसी रोते हुए बच्चे को हँसाया जाए
#NidaFazli
कोई हिन्दू कोई मुस्लिम कोई ईसाई है
सब ने इंसान न बनने की क़सम खाई है
#NidaFazli

@musafir Daily grind of life

Chalte te rehte hain ki chalna hai musafir ka naseeb
Sochte rehte hain kis rah guzar ke hum hain

#nidafazli

"कुछ भी बचा न कहने को हर बात हो गई
आओ कहीं शराब पिएँ रात हो गई"

~ निदा फ़ाज़ली

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"हर आदमी में होते हैं दस बीस आदमी
जिस को भी देखना हो कई बार देखना"

~निदा फ़ाज़ली

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नक़्शा ले कर हाथ में बच्चा है हैरान
कैसे दीमक खा गई उस का हिन्दोस्तान

~निदा फ़ाज़ली

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