पॉक्सो केस: आईजीएमसी के डॉक्टर ने नाबालिग मरीज का किया यौन शोषण, हाई कोर्ट ने जमानत याचिका की खारिज; जानें पूरा मामला
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Shimla News: हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने एक डॉक्टर की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी है। यह याचिका महिला पुलिस थाना शिमला में दर्ज एक मामले में दायर की गई थी। आरोप है कि डॉक्टर ने एक नाबालिग मरीज...
पॉक्सो केस में दिल्ली हाई कोर्ट की अनोखी सजा: सामुदायिक सेवा और जुर्माना
Delhi News: दिल्ली हाई कोर्ट ने पॉक्सो केस में अनोखा फैसला सुनाया। आरोपी को लोक नायक जयप्रकाश नारायण अस्पताल में सामुदायिक सेवा और 50,000 रुपये सैनिक कल्याण कोष में जमा करने का आदेश दिया। कोर्ट ने FIR रद्द कर दी। नाबालिग लड़की के शोषण और सोशल मीडिया के दुरुपयोग पर जस्टिस संजीव नरूला ने चिंता जताई।
सामुदायिक सेवा का आदेश
कोर्ट ने पॉक्सो केस में आरोपी को जून में एक महीने तक सामुदायिक सेवा करने का निर्देश दिया। यह सेवा लोक नायक जयप्रकाश नारायण अस्पताल में होगी। आरोपी को सेवा पूरी होने पर प्रमाण पत्र जमा करना होगा। अनुपस्थिति या दुराचार पर FIR बहाल हो सकती है।
सोशल मीडिया के दुरुपयोग पर चिंता
जस्टिस संजीव नरूला ने कहा कि पॉक्सो केस में नाबालिग का शोषण गंभीर है। आरोपी ने निजी तस्वीरों के जरिए ब्लैकमेल किया। यह सोशल मीडिया के दुरुपयोग को दर्शाता है। कोर्ट ने सहमति और निजी गरिमा के उल्लंघन पर चिंता जताई।
पीड़िता की निजता का ध्यान
पॉक्सो केस में कोर्ट ने पीड़िता की निजता और भविष्य को प्राथमिकता दी। पीड़िता ने मामले से आगे बढ़ने की इच्छा जताई। लंबित केस से उसके विवाह और सामाजिक जीवन पर असर पड़ सकता है। इसलिए, कोर्ट ने FIR रद्द की।
सैनिक कल्याण कोष में जुर्माना
आरोपी को 50,000 रुपये सैनिक कल्याण कोष में जमा करने का आदेश दिया गया। यह पॉक्सो केस में जवाबदेही का हिस्सा है। कोर्ट ने कहा कि यह सजा आत्मचिंतन और सामाजिक जिम्मेदारी को बढ़ावा देगी। आरोपी ने निजी तस्वीरें न रखने का बयान दिया।
केस की पृष्ठभूमि
पॉक्सो केस 2019 में दर्ज हुआ था। आरोपी, पीड़िता का सीनियर स्कूल छात्र, उससे पैसे मांग रहा था। निजी तस्वीरें वायरल करने की धमकी दी गई। कोर्ट ने इस व्यवहार को डिजिटल मंच का दुरुपयोग बताया।
कोर्ट का सख्त रुख
पॉक्सो केस में कोर्ट ने साफ किया कि सामान्यतः ऐसे मामलों में FIR रद्द नहीं होती। लेकिन पीड़िता की इच्छा और सामाजिक परिस्थितियों को देखते हुए यह फैसला लिया गया। यदि तस्वीरें दोबारा सामने आती हैं, तो FIR बहाल हो सकती है।