राष्ट्रपति शासन: मणिपुर में 6 महीने की अवधि और बढ़ी, लोकसभा में पारित हुआ प्रस्ताव

Manipur News: मणिपुर में राष्ट्रपति शासन की ?

वधि छह महीने और बढ़ा दी गई है। केंद्रीय गृह मंत्री ?

मित शाह ने लोकसभा में प्रस्ताव पेश किया, जिसे सदन ने मंजूरी दे दी। यह विस्तार 13 ?

गस्त 2025 से प्रभावी […]

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राष्ट्रपति शासन: मणिपुर में 6 महीने की अवधि और बढ़ी, लोकसभा में पारित हुआ प्रस्ताव

Manipur News: मणिपुर में राष्ट्रपति शासन की अवधि छह महीने और बढ़ा दी गई है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में प्रस्ताव पेश किया, जिसे सदन ने मंजूरी दे दी। यह विस्तार 13 अगस्त 2025 से प्रभा…

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मणिपुर में फिर भिड़े सुरक्षाबल और कुकी महिलाएं, 20 महिलाओं के घायल होने से बढ़ा तनाव; जानें पूरा मामला

Manipur News: मणिपुर के मुख्यमंत्री बीरेन सिंह द्वारा राज्य में पिछले करीब दो साल से फैली जातीय हिंसा पर माफी मांगने के बीच राज्य के कांगपोकपी जिले में कुकी-जो महिलाओं और सुरक्षाकर्मियों के बीच फिर से झड़प की खबर है। मंगलवार को कुकी-जो महिलाओं की एक भीड़ सुरक्षा बलों के साथ भिड़ गई। इस झड़प में करीब 20 महिलाएं घायल हो गई हैं। इससे जातीय संघर्ष से जल रहे राज्य में एक बार फिर तनाव बढ़ गया है।

पुलिस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि यह घटना थमनपोकपी के पास उयोकचिंग में हुई, जब भीड़ ने सेना, बीएसएफ और सीआरपीएफ की एक संयुक्त टीम की तैनाती को रोकने करने की कोशिश की। पुलिस ने कहा कि संयुक्त बलों ने न्यूनतम बल प्रयोग के साथ भीड़ को तितर-बितर कर दिया और अब स्थिति शांतिपूर्ण और नियंत्रण में है। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, सुरक्षा बलों को क्षेत्र में निगरानी रखने और क्षेत्र में किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए पहाड़ी की चोटियों पर भी तैनात किया गया है।

इस झड़प के बाद स्थानीय लोगों ने दावा किया है कि ट्विचिंग के सैबोल गांव में सुरक्षा बलों की कार्रवाई में कई लोग घायल हुए हैं, जो कुकी-नियंत्रित पहाड़ियों और मीतेई-प्रभुत्व वाली इंफाल घाटी के बीच तथाकथित ‘बफर जोन’ में स्थित है। उन्होंने कहा कि स्थानीय महिलाएं सुरक्षा कर्मियों द्वारा सामुदायिक बंकरों पर बलपूर्वक कब्जे का विरोध कर रही थीं, तभी सुरक्षा बलों ने उन पर हमला बोल दिया। इसके बाद महिलाओं ने भी उन पर हमला बोल दिया।

एक कुकी नेता ने आरोप लगाया कि स्थिति तब और बिगड़ गई जब सुरक्षा बलों ने प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस का इस्तेमाल किया। एक अन्य प्रदर्शनकारी ने झड़प के मंजर को बताते हुए कहा, “यह युद्ध के मैदान जैसा था।” उन्होंने आगे कहा, “हम अपनी चिंताओं को बताने आए थे, लेकिन हम पर हमले किए गए।” इस घटना के बाद, आदिवासी एकता समिति (CoTU) ने इलाके से केंद्रीय बलों की वापसी की मांग करते हुए इस क्षेत्र को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ने वालेराष्ट्रीय राजमार्ग 2 को अनिश्चित काल के लिए जाम कर दिया है।

CoTU के प्रवक्ता ने कहा, “हमारे लोगों ने बहुत कुछ सहा है। निहत्थी महिलाओं पर बल का प्रयोग हम स्वीकार नहीं कर सकते हैं।” एनएच-2 को जाम करने से इम्फाल घाटी के मेटेई क्षेत्रों में वस्तुओं की आपूर्ति बाधित होगी। इंडीजिनस ट्राइबल लीडर्स फोरम (आईटीएलएफ) की महिला शाखा ने दावा किया कि सुरक्षाकर्मियों द्वारा बल प्रयोग में कई महिलाएं घायल हुई हैं। हालांकि, सरकार की ओर से घायल लोगों की संख्या के बारे में कोई पुष्टि नहीं की गई।

बता दें कि मणिपुर के मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह ने राज्य में हुए जातीय संघर्ष के लिए मंगलवार को माफी मांगी और सभी समुदायों से पिछली गलतियों को भूलने तथा शांतिपूर्ण व समृद्ध राज्य में एक साथ रहने की अपील की।

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सोलोमन के जज्बे को सलाम; मणिपुर संघर्ष में बर्बाद हो चुका है घर, अब सेना में बनेंगे अफसर; जानें क्या बोली उनकी मां

Manipur News: मणिपुर के चुराचंदपुर जिले के सोंगगेल गांव के रहने वाले सोलोमन की कहानी साहस और दृढ़ता की मिसाल है। मई 2023 में मणिपुर हिंसा के दौरान उनका घर तबाह हो गया था। उस समय वह एक सिपाही थे। लेकिन तमाम मुश्किलों के बावजूद, उन्होंने एसीसी परीक्षा और एसएसबी इंटरव्यू पास कर लिया। अब वह ऑफिसर बनने की राह पर हैं। वर्तमान में वह मुंबई में 15 असम रेजिमेंट में तैनात हैं। यह उनकी मेहनत, लगन और यूनिट के सहयोग का ही नतीजा है कि उन्होंने यह मुकाम हासिल किया। यह घटना उनके परिवार और गांव के लिए गर्व का क्षण है।

सोलोमन के परिवार को अभी भी कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। वे अभी भी किराए के मकान में रह रहे हैं और अपने गाँव लौटने में असमर्थ हैं। सोलोमन की मां ग्रेस चिंखोनेई ने मणिपुर से बताया कि हमने संघर्ष में सब कुछ खो दिया। हमारे पास कुछ भी नहीं बचा है। वह हमारी एकमात्र आशा था और उसने कुछ ऐसा हासिल किया जिसकी गांव में किसी ने कल्पना भी नहीं की थी। यह मेरे और पूरे गांव के लिए गर्व का क्षण है क्योंकि वह हमारे गांव से आर्मी ऑफिसर बनने वाले पहले व्यक्ति होंगे।

नहीं जानते कैसे दिखता है घर

उन्होंने आगे कहा कि हम नहीं जानते कि हमारा घर कैसा दिखता है क्योंकि तनाव अभी भी बना हुआ है। सुरक्षा कारणों से हमें वहां जाने की अनुमति नहीं है। सोलोमन ने घर बनाने के लिए कर्ज लिया था। जब भीड़ ने हमला किया तो हमने सब कुछ खो दिया, जिससे हमें घर छोड़कर जंगल में भागना पड़ा। मेरे बेटे ने हमें एक उज्जवल भविष्य के लिए बड़ी उम्मीद दी है।

असम रेजिमेंट में है सिपाही

सोलोमन 2020 में असम रेजिमेंट सेंटर, शिलांग में एक सिपाही के रूप में सेना में शामिल हुए थे। प्रशिक्षण के बाद, उन्हें 15 असम रेजिमेंट बटालियन में शामिल किया गया। सोलोमन के परिवार ने बताया कि उनके बटालियन के कमांडिंग ऑफिसर ने उन्हें तैयारी में मदद की। सोलोमन के भाई डैनियल ने कहा कि यूनिट के समर्थन के बिना, सोलोमन परीक्षा और एसएसबी इंटरव्यू के लिए अच्छी तरह से तैयारी नहीं कर पाते। वह पहली बार में परीक्षा पास नहीं कर सके। दूसरे प्रयास में, उन्हें यूनिट में अपने सीनियर्स से मार्गदर्शन मिला और यही उनके लिए निर्णायक साबित हुआ।

यूनिट के पहले सदस्य बने सोलोमन

एक सैन्य सूत्र के अनुसार, सोलोमन यूनिट में पहले व्यक्ति हैं जिन्होंने ACC पास किया और चुने गए। यह एक प्रेरणादायक उपलब्धि है क्योंकि अन्य कर्मी भी इस प्रवेश के लिए प्रेरित होंगे। आर्मी के सदर्न कमांड ने भी अपने आधिकारिक एक्स हैंडल पर सोलोमन की उपलब्धि की सराहना की। उन्होंने लिखा कि अपने गृह राज्य मणिपुर में उथल-पुथल के बीच, 15 असम के सिपाही सोलोमन ने लचीलेपन का उदाहरण दिया है। सब कुछ खोने के बाद, उन्होंने प्रतिष्ठित ACC परीक्षा पास करके विपत्ति को ताकत में बदल दिया। अब एक अधिकारी बनने की राह पर, उनकी यात्रा आशा और दृढ़ संकल्प का प्रमाण है।

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मणिपुर में अलग-अलग घटनाओं में दो बिहार के मजदूरों समेत तीन की मौत, पुलिस के एक उग्रवादी को भी मार गिराया

Manipur Violence: मणिपुर से फिर हिंसा की खबर सामने आ रही है। शनिवार को दो अलग-अलग घटनाओं में तीन लोग मारे गए। इनमें से दो बिहार के मजदूर शामिल थे। वहीं, पुलिस ने एक उग्रवादी को भी मुठभेड़ में मार गिराया है। शनिवार शाम को काकचिंग जिले में दो श्रमिकों की गोली मारकर हत्या कर दी गई। मृतकों की पहचान 18 साल के सुनेलाल कुमार और 17 साल के दशरथ कुमार के रूप में हुई। वे बिहार के गोपालगंज जिले के राजवाही गांव के रहने वाले थे।

दोनों युवक काकचिंग में मैतेई बहुल इलाके में रह रहे थे। काकचिंग-वाबागई रोड पर पंचायत कार्यालय के पास शाम लगभग 5:20 बजे अज्ञात हमलावरों ने गोली मारकर उनकी हत्या कर दी।

मजदूरों पर हमले का कारण अभी स्पष्ट नहीं हो पाया है। इस बात की संभावना है कि मणिपुर में मैतेई और कुकी समुदायों के बीच चल रहे जातीय संघर्ष के कारण इनकी हत्या की गई है।

आपको बता दें कि इससे पहले शनिवार को मणिपुर पुलिस के कमांडो ने थोउबाल जिले के सालुंगफाम मणिंग लेकाई में संदिग्ध उग्रवादियों के साथ मुठभेड़ में एक उग्रवादी को मार गिराया। छह अन्य को गिरफ्तार भी किया है। मृतक उग्रवादी की पहचान 16 साल के लाइश्राम प्रियाम उर्फ लोकटक के रूप में हुई। वह प्रतिबंधित संगठन PREPAK का सदस्य था।

पुलिस को इलाके में हथियारबंद लोगों की मौजूदगी की खुफिया जानकारी मिली थी। इसके बाद सुबह 9:30 बजे के आसपास सालुंगफाम हाई स्कूल के पास तलाशी अभियान चलाया। मुठभेड़ के दौरान प्रियाम को दाहिने पेट में गोली लगी और बाद में इम्फाल के राज मेडिसिटी अस्पताल में उसकी मौत हो गई।

पुलिस ने हथियारों की बरामदगी की है, जिनमें तीन इंसास राइफल, एक एसएलआईर राइफल, एक .303 राइफल, एक AMOGH राइफल, कई मैगजीन और गोला-बारूद शामिल थे। पुलिस ने एक चार पहिया वाहन भी जब्त किया है।

प्रियाम की मां लाइश्राम गीटमाला ने बताया कि उसका बेटा तीन महीने पहले घर छोड़कर गया था ताकि वह कुकी उग्रवादियों द्वारा किए जा रहे हमलों से गांवों की रक्षा कर सके। उसने यह भी बताया कि प्रियाम हाई स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट परीक्षा की तैयारी कर रहा था। उन्होंने कहा, “इस संकट को खत्म किया जाए। अगर हिंसा नहीं रुकी तो कई परिवार वही दर्द महसूस करेंगे जो मैं आज अनुभव कर रही हूं।”

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मणिपुर पर क्या बोले आरएसएस प्रमुख डॉ मोहन भागवत ने!

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