Caste is not a relic.
It is not something that happened in the past and left traces.
It is a living system, actively maintained, actively defended,
often most aggressively by the people who benefit from it most
and claim to be unaware of it entirely.
Unawareness is a privilege too.
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Explained: UGC’s New Rules On Caste Discrimination And Why They Are Being Opposed
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जातिगत भेदभाव: भागवत कथा सभी हिंदुओं का अधिकार, लेकिन असत्य बचना चाहिए; काशी विद्वत परिषद
Uttar Pradesh News: इटावा में जातिगत भेदभाव की घटना ने हिंदू समाज को झकझोर दिया। गैर-ब्राह्मण भागवताचार्य की चोटी काटकर अपमान किया गया। काशी विद्वत परिषद ने इसे निंदनीय बताया। परिषद के अध्यक्ष प्रो. वशिष्ठ त्रिपाठी ने कहा कि भागवत कथा का अधिकार सभी हिंदुओं को है। उन्होंने असत्य से बचने की सलाह दी। परिषद ने समाज को बांटने की कोशिशों को नाकाम करने का आग्रह किया।
काशी विद्वत परिषद की बैठक
काशी विद्वत परिषद ने इटावा की घटना पर गंभीर चिंता जताई। परिषद के महामंत्री प्रो. रामनारायण द्विवेदी ने कहा कि सनातन परंपरा में सभी को सम्मान मिला है। महर्षि वाल्मीकि, वेदव्यास जैसे गैर-ब्राह्मण ऋषियों का उदाहरण दिया। उन्होंने जातिगत भेदभाव को गलत ठहराया। परिषद ने व्यास पीठ की मर्यादा बनाए रखने की अपील की। समाज में एकता और विश्वास को बढ़ाने पर जोर दिया।
सामाजिक एकता पर जोर
परिषद ने कहा कि सनातन धर्म में जातिगत भेदभाव का कोई स्थान नहीं है। सभी हिंदुओं को भगवान की कथा करने का अधिकार है। घटना में कानून का उल्लंघन होने पर निष्पक्ष जांच की मांग की। परिषद ने हिंदुओं से आपसी सद्भाव बनाए रखने को कहा। प्रो. रामकिशोर त्रिपाठी समेत कई विद्वानों ने एकता का संदेश दिया। उत्तर प्रदेश सरकार की वेबसाइट पर संवैधानिक कार्रवाई की जानकारी उपलब्ध है।
घटना का विवरण
इटावा में गैर-ब्राह्मण भागवताचार्य के साथ अमानवीय व्यवहार हुआ। उनकी चोटी काटी गई और अपमान किया गया। वीडियो वायरल होने पर समाजवादी पार्टी ने भागवताचार्यों को सम्मानित किया। यजमान महिला ने छेड़छाड़ का आरोप लगाया। इससे यादव समाज में आक्रोश फैला। पुलिस पर पथराव और तोड़फोड़ हुई। राइट न्यूज इंडिया पर इस घटना की विस्तृत जानकारी उपलब्ध है। परिषद ने ऐसी घटनाओं पर रोक लगाने की अपील की।
कानूनी कार्रवाई की मांग
काशी विद्वत परिषद ने जातिगत भेदभाव की इस घटना को गंभीर बताया। उन्होंने प्रशासन से निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की। परिषद ने हिंदू समाज से जाति आधारित भेदभाव छोड़कर राष्ट्रीय चेतना विकसित करने का आग्रह किया। विद्वानों ने शास्त्रों का हवाला देते हुए कहा कि घृणा और द्वेष से समाज कमजोर होता है। सभी को मिलकर विश्व गुरु भारत का निर्माण करना चाहिए।
स्कूल में प्रताड़ना: मंडी में एसी के छात्र को तीन घंटे शौचालय में रखा बंद, मां ने लगाए जातिसूचक शब्द बोलने के आरोप
Himachal News: हिमाचल के मंडी जिले के राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला मलोह में एक गंभीर घटना हुई। 11वीं कक्षा के एक छात्र को स्कूल में प्रताड़ना के बाद शौचालय में तीन घंटे तक बंद रखा गया। छात्र की मां हिमा देवी ने बताया कि 19 जून को उनके बेटे को स्कूल की छुट्टी के बाद सायं छह बजे तक शौचालय में बंद रखा गया। उन्होंने मिड-डे मील प्रभारी पर जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल करने का भी आरोप लगाया।
मां की शिकायत और पुलिस जांच
हिमा देवी ने सुंदरनगर थाने में शिकायत दर्ज की। उन्होंने कहा कि उनके बेटे को किसी शरारती तत्व ने शौचालय में बंद कर दिया। छात्र ने खुद को किसी तरह बाहर निकाला। मां ने यह भी आरोप लगाया कि मिड-डे मील प्रभारी ने उनके बेटे को भोजन के समय जातिसूचक शब्द कहकर अपमानित किया। सुंदरनगर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। डीएसपी भारत भूषण ने आगामी कार्रवाई की पुष्टि की।
प्रभारी ने आरोपों से किया इनकार
मिड-डे मील प्रभारी ने सभी आरोपों को खारिज किया है। उन्होंने दावा किया कि उनके खिलाफ साजिश रची गई। प्रभारी का कहना है कि कुछ शरारती छात्रों ने ही बच्चे को शौचालय में बंद किया। मलोह पंचायत के लोगों ने एक अध्यापिका के खिलाफ भी बच्चों को सजा देने का विरोध जताया। इस विरोध में अध्यापिका ने प्रभारी को दोषी ठहराया। यह मामला राष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा में है।
स्कूल प्रशासन का बयान
प्रधानाचार्य कमल सिंह ने बताया कि वह दो दिन की छुट्टी पर थे। सोमवार को स्कूल पहुंचने पर वे इस मामले की पूरी जानकारी जुटाएंगे। मलोह पंचायत के लोग स्कूल प्रशासन के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। हिमाचल पुलिस ने जांच तेज कर दी है। स्थानीय लोगों में इस घटना को लेकर गहरा आक्रोश है। सभी पक्षों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं।
स्थानीय लोगों में आक्रोश
मलोह पंचायत के निवासियों ने स्कूल में हुई इस घटना पर नाराजगी जताई। लोगों का कहना है कि स्कूल में प्रताड़ना और जातिगत भेदभाव जैसे मामले गंभीर हैं। उन्होंने स्कूल प्रशासन से जवाबदेही की मांग की। पुलिस ने मामले को गंभीरता से लिया है और सभी आरोपों की गहन जांच कर रही है। इस घटना ने स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा पर सवाल उठाए हैं।